Live Updates
वांगचुक मामले में हाईकोर्ट सख्त, मेडिकल टीम ही करेगी स्वास्थ्य पर अंतिम फैसलाअमृतसर में अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स-हथियार तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़, 5.557 किलो हेरोइन और दो पिस्तौल के साथ 4 गिरफ्तारपंजाब का मौसम बदलेगा, 20 से 22 जुलाई तक भारी बारिश का येलो अलर्टमांवां-धियां सत्कार योजना के तहत बड़ी संख्या में महिलाओं को 3,000 रुपये मिले; बाकी बची माताओं-बहनों को पहली अगस्त को मिलेंगे पैसे: अरविंद केजरीवाल’मुख्यमंत्री माँवां धियां सत्कार योजना’ का सबसे अधिक लाभ 36–59 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं को, जो जीवन के सबसे अधिक आर्थिक ज़िम्मेदारियों वाले दौर में हैं18 वर्षों से सेवा दे रहे हजारों मनरेगा कर्मचारियों की अनदेखी नहीं कर सकती मोदी सरकार: तरुनप्रीत सिंह सौंदमोदी जी ने अपने अहंकार में सोनम वांगचुक का अपमान किया- केजरीवालवांगचुक मामले में हाईकोर्ट सख्त, मेडिकल टीम ही करेगी स्वास्थ्य पर अंतिम फैसलाअमृतसर में अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स-हथियार तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़, 5.557 किलो हेरोइन और दो पिस्तौल के साथ 4 गिरफ्तारपंजाब का मौसम बदलेगा, 20 से 22 जुलाई तक भारी बारिश का येलो अलर्टमांवां-धियां सत्कार योजना के तहत बड़ी संख्या में महिलाओं को 3,000 रुपये मिले; बाकी बची माताओं-बहनों को पहली अगस्त को मिलेंगे पैसे: अरविंद केजरीवाल’मुख्यमंत्री माँवां धियां सत्कार योजना’ का सबसे अधिक लाभ 36–59 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं को, जो जीवन के सबसे अधिक आर्थिक ज़िम्मेदारियों वाले दौर में हैं18 वर्षों से सेवा दे रहे हजारों मनरेगा कर्मचारियों की अनदेखी नहीं कर सकती मोदी सरकार: तरुनप्रीत सिंह सौंदमोदी जी ने अपने अहंकार में सोनम वांगचुक का अपमान किया- केजरीवाल
1 min read

Punjab-Haryana High Court ने Advocate की याचिका खारिज की – ‘Judge पर Case Transfer का नहीं है अधिकार’

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को एक महिला वकील की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपने तीन मामलों को एक विशेष जज की अदालत से किसी अन्य अदालत में ट्रांसफर करने की मांग की थी। अदालत ने साफ कहा कि उसके पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है और याचिका “ज्यूरिसडिक्शनल लिमिटेशन” (क्षेत्रीय सीमाओं) के चलते खारिज की जाती है।

इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस शील नागु और जस्टिस संजीव बेरी की बेंच ने की। याचिका दायर करने वाली 37 वर्षीय महिला वकील अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से हैं और उन्होंने अपने आवेदन में आरोप लगाया था कि जिस जज की अदालत में उनके केस चल रहे हैं, वह पहले बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा (BCPH) से जुड़े रहे हैं। यह वही संस्था है जिससे उन्हें पहले उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था। ऐसे में उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है और जज का केस सुनना “न्याय के सिद्धांतों” के खिलाफ है।

क्या था मामला?

महिला वकील ने कोर्ट में कहा कि:

  • 2022 में गुड़गांव में एक डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी ने उनके साथ यौन उत्पीड़न किया।
  • BCPH के कुछ सदस्यों ने उन्हें बार में एंट्री करने से रोका।
  • उनके खिलाफ झूठी शिकायतें की गईं, जिनमें से एक पर कोर्ट ने बाद में लीगल नोटिस को खारिज कर दिया।
  • 22 जुलाई को उनके खिलाफ एक कंटेम्प्ट नोटिस (अवमानना नोटिस) जारी किया गया, जो उन पर दबाव बनाने की कोशिश थी कि वे एक सीनियर पुलिस ऑफिसर के खिलाफ लगाए गए आरोप वापस लें।

उन्होंने अदालत से यह भी अनुरोध किया कि भविष्य में उनके केस भी उस जज की अदालत में ना लगें, जिससे उन्हें न्याय की उम्मीद नहीं।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने साफ किया कि:

  • पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पास अपने भीतर ही मामलों को एक बेंच से दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने का कोई अधिकार नहीं है
  • यदि याचिकाकर्ता को किसी जज के फैसले से आपत्ति है, तो वह लेटर पेटेंट अपील (LPA) दायर कर सकती हैं या फिर सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती हैं।
  • अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट का काम राज्य सरकार या उसके संस्थानों द्वारा लिए गए फैसलों की वैधता की जांच करना होता है।
  • हाईकोर्ट सिर्फ उन्हीं मामलों में हस्तक्षेप कर सकता है जहां राज्य या उसके अंगों ने कोई गड़बड़ी की हो।

कोर्ट ने कहा,इस कोर्ट के पास किसी केस को किसी दूसरे हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने का अधिकार नहीं है। इसके लिए याचिकाकर्ता उपयुक्त मंच पर जा सकती हैं।”

क्या विकल्प बचे हैं याचिकाकर्ता के पास?

कोर्ट ने कहा कि अब याचिकाकर्ता:

  1. LPA (Letter Patent Appeal) फाइल कर सकती हैं अगर उन्हें लगता है कि सिंगल बेंच ने अपने अधिकारों से बाहर जाकर कोई फैसला सुनाया।
  2. सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकती हैं।
  3. अगर उन्हें निष्पक्ष सुनवाई पर संदेह है, तो वे उचित संवैधानिक या विधिक रास्ते अपना सकती हैं।

कोर्ट का निष्कर्ष

कोर्ट ने अंत में कहा:इस याचिका में दखल देने की जरूरत नहीं है। याचिकाकर्ता कानून के तहत जो भी उचित विकल्प है, उसे अपना सकती हैं।”

यह फैसला न्यायपालिका की सीमाओं और प्रक्रियाओं को स्पष्ट करता है, खासकर जब बात जज पर ‘कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ के आरोपों की हो। यह भी साफ हुआ कि न्याय पाने के लिए एक वकील के पास कई वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध हैं, लेकिन कोर्ट की शक्तियां भी सीमित होती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *