Live Updates
दिल्ली मेट्रो यात्रियों के लिए बड़ी खबर, 16 मेट्रो स्टेशन अगले आदेश तक बंद, सुरक्षा कारणों से लिया गया फैसलापंजाब में मानसून सक्रिय, भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारीभगवंत मान सरकार की शिक्षा क्रांति से राज्य के विद्यार्थियों को अपना व्यवसाय शुरू करने में मिली बड़ी मदद ; 20,000 से अधिक छात्र उद्यमों ने पहले ही वर्ष में कमाए 90 करोड़ रुपयेमुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का बड़ी राहत का ऐलान: पंजाब में बनाए जाएंगे 10 लाख नए राशन कार्डमोदी सरकार की बर्बरता के शिकार छात्रों की मदद के लिए केजरीवाल ने दिनभर अस्पताल, थाने से लेकर जंतर-मंतर तक की भागदौड़देश के युवा और किसान सड़कों पर हैं, लेकिन बातचीत करने के बजाय, भाजपा सरकार उनकी आवाज़ दबाने के लिए बल का इस्तेमाल कर रही है: बलतेज पन्नूपुनर सुरजीत अकाली दल ने ‘वारिस पंजाब दे’ के साथ गठबंधन का किया ऐलान, पंथक एकता मजबूत करने पर जोरदिल्ली मेट्रो यात्रियों के लिए बड़ी खबर, 16 मेट्रो स्टेशन अगले आदेश तक बंद, सुरक्षा कारणों से लिया गया फैसलापंजाब में मानसून सक्रिय, भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारीभगवंत मान सरकार की शिक्षा क्रांति से राज्य के विद्यार्थियों को अपना व्यवसाय शुरू करने में मिली बड़ी मदद ; 20,000 से अधिक छात्र उद्यमों ने पहले ही वर्ष में कमाए 90 करोड़ रुपयेमुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का बड़ी राहत का ऐलान: पंजाब में बनाए जाएंगे 10 लाख नए राशन कार्डमोदी सरकार की बर्बरता के शिकार छात्रों की मदद के लिए केजरीवाल ने दिनभर अस्पताल, थाने से लेकर जंतर-मंतर तक की भागदौड़देश के युवा और किसान सड़कों पर हैं, लेकिन बातचीत करने के बजाय, भाजपा सरकार उनकी आवाज़ दबाने के लिए बल का इस्तेमाल कर रही है: बलतेज पन्नूपुनर सुरजीत अकाली दल ने ‘वारिस पंजाब दे’ के साथ गठबंधन का किया ऐलान, पंथक एकता मजबूत करने पर जोर
1 min read

केजरीवाल की एफिडेविट में उठाए गए प्रमुख तथ्यों में से किसी पर भी CBI को आपत्ति नहीं: आप

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने तथाकथित शराब नीति मामले में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा अपनी रिक्यूजल अर्जी के तहत दाखिल किए गए नए हलफनामे पर दिल्ली हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। अपने जवाब में, सीबीआई ने अरविंद केजरीवाल द्वारा रिकॉर्ड पर रखे गए किसी भी प्रमुख तथ्य का खंडन नहीं किया है, फिर भी उसका दावा है कि इसमें हितों का कोई टकराव नहीं है।

 

अरविंद केजरीवाल ने इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष पेश होकर एक अतिरिक्त हलफनामा दायर किया था, जिसमें बताया गया था कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में शामिल हैं। हलफनामे में यह भी कहा गया था कि भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो इस मामले में सीबीआई की तरफ से पेश होते हैं, उन्हें ऐसे मामले सौंपते हैं जिनके लिए उन्हें फीस मिलती है। इसमें आगे कहा गया कि 2022 में पैनल में शामिल होने के बाद से बेटे को 5,500 से अधिक मामले आवंटित किए गए हैं, जो एक युवा वकील के लिए असाधारण रूप से बड़ी संख्या है और पैनल में शामिल होना और मामलों का यह आवंटन माननीय न्यायाधीश के हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कार्यकाल के दौरान ही हुआ है। हलफनामे में कहा गया है कि ये तथ्य किसी भी वादी के मन में पक्षपात की उचित आशंका पैदा करते हैं।

 

अपने जवाब में सीबीआई ने इस बात से इनकार नहीं किया है कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में शामिल हैं। उसने इस बात का भी खंडन नहीं किया है कि भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो इस मामले में सीबीआई के लिए पेश होते हैं, उन्हें फीस वाले मामले सौंपते हैं। सीबीआई ने आगे इस बात से भी इनकार नहीं किया है कि 2022 में पैनल में शामिल होने के बाद से बेटे को 5,500 से अधिक मामले आवंटित किए गए हैं, जो एक युवा वकील के लिए असाधारण रूप से बड़ी संख्या है। उसने इस बात का भी खंडन नहीं किया है कि पैनल में यह नियुक्ति और मुकदमों का यह आवंटन माननीय न्यायाधीश के हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कार्यकाल के दौरान ही हुआ है। अगर यह हितों का टकराव नहीं है, तो फिर क्या है?

 

सीबीआई का कहना है कि यह हितों का टकराव नहीं है। क्या देश में इसी तरह से काम होता है? ये कोई कोरी चिंताएं नहीं हैं। ये रिकॉर्ड पर मौजूद स्पष्ट तथ्य हैं जो निष्पक्षता और संस्थागत ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

 

सीबीआई ने आगे यह तर्क दिया है कि इस लॉजिक को स्वीकार करने का मतलब यह होगा कि जिन जजों के रिश्तेदार सरकारों या पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (पीएसयू) के पैनल में शामिल हैं, उन्हें ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। यह ध्यान भटकाने की कोशिश है। मुद्दा पैनल में शामिल होना नहीं है। मुद्दा यह है कि मामले में पेश हो रहे वही सॉलिसिटर जनरल जज के निकटतम परिवार को हजारों फीस वाले मामले आवंटित कर रहे हैं।

 

यह सभी जजों के बारे में नहीं है। यह विशिष्ट और निर्विवाद तथ्यों वाले एक मामले के बारे में है। जब केस में बहस करने वाले एक ही कानून अधिकारी द्वारा 5,500 से अधिक मामले आवंटित किए जाते हैं, तो यह कोई रूटीन काम नहीं है। इसे सामान्य कहना गंभीर सवाल खड़े करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *