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कोयले की कमी पर जानें- क्‍या कहती है सरकार और उसके आंकड़े, राज्‍य रो रहे कोयले की कमी का रोना

Electricity Pylons at sunset on background

कोयले की कमी पर सरकार ने साफ कहा है कि इसकी कोई कमी नहीं है। देश में कोयले का पर्याप्‍त भंडार उपलब्‍ध है। सरकार के आंकड़े भी बताते हैं कि देश में कोयले के उत्‍पादन में तेजी आई है।देश में कोयले की कमी और बिजली संकट की आशंका को नकारने के बाद भी कई राज्‍य लगातार कोयले की आपूर्ति में कमी और बिजली संकट गहराने की बात कर रहे हैं। सरकार लगातार कोयले की आपूर्ति में सुधार की बात कर रही है। सरकार की तरफ से कहा गया है कि पहले के मुकाबले इस बार न केवल उत्‍पादन बढ़ा है बल्कि आपूर्ति भी बढ़ाई गई है। सरकार का ये भी कहना है कि अर्थव्‍यवस्‍था में आई तेजी की वजह से बिजली की मांग बढ़ी है। इसको देखते हुए बिजली संयंत्रों ने पहले ही अपेक्षा कहीं अधिक बिजली यूनिट का उत्‍पादन किया है।

कोयला मंत्रालय द्वारा किए गए एक ट्वीट में बताया गया है कि मौजूदा वित्‍तीय वर्ष में करीब 15 फीसद अधिक कोयला डिस्‍पेच किया गया है। वहीं भारत कोकिंग कोल लिमिटेड ने कोयले का उत्‍पादन करीब 21.4 फीसद अधिक करने को लेकर एक ट्वीट किया है। इसके अलावा महानदी कोल फील्‍ड लिमिटेड ने भी तलचर से कोयले से भरी 62 रैक्‍स डिस्‍पेच करने को लेकर एक ट्वीट किया है। एक ट्वीट में एमसीएल ने कहा है कि उन्‍होंने करीब 5.34 लाख टन कोयला डिस्‍पेच किया है जिसमें से करीब 4.25 लाख टन कोयला बिजली संयंत्रों को भेजा गया है।

कोयला मंत्रालय की मंथली रिपोर्ट बताती है कि सितंबर 2021 में 51.70 मैट्रिक टन कोयले का उत्‍पादन किया गया था, जबकि इसी अवधि में वर्ष 2019 में ये उत्‍पादन 39.48 टन था और इसी अवधि में वर्ष 2020 में ये 38.90 मेट्रिक टन था। आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2021 में 59.80 मेट्रिक टन कोयला डिस्‍पेच किया गया था, जो कि इसी अवधि में वर्ष 2019 और 2020 की तुलना में कहीं अधिक था।

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